बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधकर भाई के लिए लम्बी उम्र की कामना की, भाई ने रक्षा करने का वचन दिया
अरवल से आजाद खान की रिपोर्ट
अरवल, जिले में शुक्रवार को रक्षाबंधन का पर्व राखी हर्ष व उल्लास के साथ मनाया गया. बहनों ने भाइयों की कलाई में राखी बांध रक्षा का संकल्प तो लिया ही मिठाई खिलाकर उनके दीर्घायु की कामना भी की. वहीं भाइयों ने भी अपने सामर्थ्य के अनुसार बहनों को उपहार प्रदान किया.
कोरोनाकाल के बीच जिला में रक्षाबंधन पर्व पूरे हर्षोल्लास व शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ. रक्षा बंधन को लेकर चारों ओर उत्सवी माहौल था. चहुंओर राखी के बज रहे गीतों से वातावरण गुंजायमान था. भाई-बहन के स्नेह और लगाव का पर्व रक्षा बंधन का त्योहार आज परंपरागत हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया गया. एक छोटे से धागे में प्रेम को बांधने का इतिहास पुराना है. घर-घर में बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांध कर हर मुसीबत में साथ रहने का वचन लिया. कोरोना वायरस के भय के बीच घर परिवार में उत्सव का माहौल कायम रहा. सावन का अंतिम सोमवार होने के चलते श्रद्धालुओं ने शिवालयों में शारीरिक दूरी का पालन करते हुए पूजन-अर्चन किया. इसके बाद युवतियों व महिलाओं ने भाइयों की कलाई में राखी बांधकर उनसे सुरक्षा का वचन लिया. वहीं हर तरफ भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना, चंदा रे मेरे भइया से कहना, बहना याद करे, बहना ने भाई की कलाई में प्यार बांधा है.. जैसे मार्मिक गीतों की धूम मची रही. हालांकि रक्षा पर्व के दिन सुबह में हो रही बारिश ने उत्सव में खलल डाला. बावजूद इसके बहनों की आस्था व श्रद्धा भाइयों को रक्षा सूत्र बांधने से रोक नहीं सकी.
कोरोनाकाल के बीच जिला में रक्षाबंधन पर्व पूरे हर्षोल्लास व शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ. रक्षा बंधन को लेकर चारों ओर उत्सवी माहौल था. चहुंओर राखी के बज रहे गीतों से वातावरण गुंजायमान था. भाई-बहन के स्नेह और लगाव का पर्व रक्षा बंधन का त्योहार आज परंपरागत हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया गया. एक छोटे से धागे में प्रेम को बांधने का इतिहास पुराना है. घर-घर में बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांध कर हर मुसीबत में साथ रहने का वचन लिया. कोरोना वायरस के भय के बीच घर परिवार में उत्सव का माहौल कायम रहा. सावन का अंतिम सोमवार होने के चलते श्रद्धालुओं ने शिवालयों में शारीरिक दूरी का पालन करते हुए पूजन-अर्चन किया. इसके बाद युवतियों व महिलाओं ने भाइयों की कलाई में राखी बांधकर उनसे सुरक्षा का वचन लिया. वहीं हर तरफ भइया मेरे राखी के बंधन को निभाना, चंदा रे मेरे भइया से कहना, बहना याद करे, बहना ने भाई की कलाई में प्यार बांधा है.. जैसे मार्मिक गीतों की धूम मची रही. हालांकि रक्षा पर्व के दिन सुबह में हो रही बारिश ने उत्सव में खलल डाला. बावजूद इसके बहनों की आस्था व श्रद्धा भाइयों को रक्षा सूत्र बांधने से रोक नहीं सकी.
घर परिवार में सुबह से ही विविध प्रकार के व्यंजन व मिठाई बनाने का सिलसिला जारी रहा. शुभ मुर्हुत के अनुसार बहनों ने व्रत रख भाइयों के कलाई में रक्षा सूत्र बांधा. इसमें बड़ों के साथ नन्हें-मुन्नों की सहभागिता देखते ही बन रही थी. खासकर पर्व को लेकर बच्चों का उत्साह देखते ही बना. नन्हें मुन्हें भाई-बहन रक्षा सूत्र बांधने को लेकर उतावले रहे. वही परिवार की माताएं और बहनें भी बच्चों को उत्साहित करने में जुटी रहीं. देर शाम तक बहनों द्वारा भाइयों को राखी बांधने का क्रम जारी रहा.
