चल उड़ जा रे...आखिरकार शरद यादव को छोड़ना पड़ा सांसद आवास ।
बिहार ...
● कहा-इस घर से मेरी कई यादें जुड़ी हुई, बेटी के घर हुए शिफ्ट ।
नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई हार जाने के बाद आखिरकारी दिग्गज समाजवादी नेता शरद यादव को दिल्ली के आलीशान सरकारी बंगले को छोड़ने को मजबूर होना पड़ा। राज्यसभा का कार्यकाल खत्म हो जाने के बावजूद वे बंगले पर कब्जा बनाए हुए थे। सरकार की ओर से नोटिस मिलने के बाद वे बंगला बचाने के लिए पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे लेकिन दोनों जगह उन्हें हार झेलनी पड़ी।
फिर उन्हे राजद की ओर उम्मीद की किरण दिखी...लेकिन सब बेकार।आखिर में उन्हें बंगले को खाली करने को विवश होना पड़ा और वे बेटी सुभासिनी अली के घर चले गए।
शरद यादव पिछले 22 सालों से 7, तुगलक रोड वाले सरकारी बंगले में रह रहे थे। मंगलवार को सरकारी आवास को छोड़ते वक्त शरद यादव ने कहा कि इस घर से कई लड़ाइयां लड़ी गई हैं। यहां पर कई सारी यादें जुड़ी हैं। शरद यादव की बेटी सुभासिनी अली ने एक ट्वीट में कहा-तुगलक रोड पर 23 साल की सफल यात्रा को समाप्त करते हुए 48 साल के शुद्ध, समर्पित और निस्वार्थ योगदान समाज के उत्थान के लिए रहा...अब नई शुरूआत की प्रतीक्षा में।
सांसद न होने के बावजूद इस सरकारी बंगले में जमे हुए शरद यादव को उम्मीद थी कि लालू यादव के जरिये वे राज्यसभा पहुंच जाएंगे लेकिन जब बात नहीं बनी तो उन्होंने सरकारी बंगले को खाली कर दिया और अपनी बेटी सुभाषिनी राज राव के घर शिफ्ट हो गये।
*घर बदल रहा हूं, राजनीति नहीं*
बंगला खाली किये जाने के दौरान जब मीडिया ने पूछा कि क्या उनकी राजनीति खत्म हो गयी है। इस पर शरद यादव ने कहा कि घर बदल रहा हूं, राजनीति नहीं। मेरी राजनीति जारी रहेगी।
*पत्नी ने कहा-हम पूरी मजबूती के साथ वापस लौटेंगे*
बंगला खाली होने के समय उनके साथ मौजूद पत्नी रेखा यादव ने मीडिया से कहा, ये मत समझिये कि हम दिल्ली के लुटियन जोन को हमेशा के लिए छोड़कर जा रहे हैं। हम पूरी मजबूती के साथ वापस लौटेंगे। शायद शऱद यादव की पत्नी को अपने बेटे शांतनु औऱ बेटी सुभाषिनी से उम्मीदें होंगी। सुभाषिनी ने 2020 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था। वहीं शऱद यादव के बेटे शांतनु 2024 के लोकसभा चुनाव में राजद के टिकट के दावेदार हैं।

