खाद सामग्री जांच करने के लिए कोई अधिकारी नहीं
आए दिन भी हो सकती है इस तरह की अप्रिय घटना
करपी से अरविंद कुमार की रिपोर्ट
करपी (अरवल) जिले में दशहरा मेले में जलेबी समोसा ब्रेड इत्यादि विषाक्त भोजन खाने से कई दर्जन लोग बीमार होकर सदर अस्पताल में इलाज करवाने आए थे।लेकिन अभी तक जिले के कोई भी दुकान पर खाद्य सामग्री को जांच करने के लिए कोई भी अधिकारी नहीं गए। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जिले में ही नहीं पूरे प्रमंडल में खाद पदार्थों के जांच करने के लिए केवल एक अधिकारी हैं। और उनके जिम्मे गया, औरंगाबाद, नवादा, जहानाबाद और अरवल जिला है। जिसके कारण स्थिति यह है कि डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों की जांच की कौन कहे यहां तो खुले में बिक रहे खाद्य पदार्थों की जांच करने वाला भी कोई नहीं है। आश्चर्य की बात तो यह है कि जिले का अपना फूट इंस्पेक्टर भी नहीं है। ऐसी स्थिति में खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वालों की जिले में चांदी कट रही है।एक तरफ सरकार डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों को बार कोड़ से नियंत्रण कर उसकी गुणवत्ता एवं वजन को सही करने का प्रयास कर रही है तो दूसरी तरफ सरकार के पास ऐसा तंत्र नहीं है कि वह सभी जिलों में इस नियम का पालन करा सके। जिले में डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों का रूप पोली पैक खाद्य पदार्थों ने ले लिया है जिसके ऊपर कुछ भी अंकित नहीं होता। यहां तक की पैक किये गए सामान का वजन भी। ऐसे में उपभोक्ता दुकानदार के विश्वास पर ही उसे खरीदने के लिए विवश होते हैं। जिससे जिले में मिलावट का खेल बदस्तूर जारी है। अगर खुले खाद्य पदार्थ को कोई उपभोक्ता नहीं खरीदता है तो पैकेट बंद सामग्री की भी क्या गारंटी है कि उसमें वजन सही है या उसमें मिलावट नहीं है पूछे जाने पर सदर अस्पताल के वरीय चिकित्सा पदाधिकारी डॉ l महेंद्र शर्मा ने बताया कि विषाक्त भोजन खाने से बीमार 26 लोग सदर अस्पताल में आए थे सदर अस्पताल के मेडिकल टीम और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करपी के टीम बीमार लोगों के सभी गांव में भी नहीं पहुंच सके कही कही पहुंची थी वही कटेसर टोला खेदरू बिगहा में एक ही घर के दो परिवार छोड़कर सभी परिवार फूड प्वाइजनिंग का मामला सामने आया था जहां सदर हॉस्पिटल और करपी के टीम नहीं पहुंच पाई l जिले में क्या पूरे कमिश्नरी में एक फूड इंस्पेक्टर हैं उनके जिम्मे पांच जिला का कार्यभार है। हमारा विभाग को खाने में रसायन जांच करने की काम नही है l
