ईद मिलाद उल नबी जुलूस के साथ सम्पन्न
पैगंबर मुहम्मद पूर्णता के प्रतीक: डॉ.ज्योति
करपी से उपेंद्र कुमार की रिपोर्ट
करपी।स्थानीय प्रखंड क्षेत्र के अमीनाबाद,बाजितपुर, करपी, इमामगंज,रोहाई समेत विभिन्न गांव में ईद मिलाद उल नबी का जुलूस निकाला गया.अमीनाबाद में जुलूस मोहम्मद सरवर आलम के नेतृत्व में निकाला गया. इस मौके पर हाफिज गुलाम सरवर ने कहा इस्लामिक कैलेंडर में रब्बी उल अव्वल तीसरा महीना है, जिसे हिजरी कैलेंडर भी कहा जाता है. अरबी में,"रब्बी" शब्द का अर्थ वसंत है जबकि अल अव्वल"का अर्थ है पहला. इसलिए रब्बी उल अव्वल का मतलब 'द फर्स्ट स्प्रिंग' है. रबी उल अव्वल इस्लामी इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण महीना है, क्योंकि इस महीने में पवित्र पैगंबर मोहम्मद के जन्म के महीने के रूप में जाना जाता है. पैगंबर मोहम्मद के जन्म से पहले, लोग अज्ञानता और अंधेरे की स्थिति में रह रहे थे. वे अल्लाह की राह से भटक रहे थे. जैसे ही पैगंबर का जन्म हुआ, वह अपने साथ सच और अल्लाह का पैग़ाम, लेकर आए. यह संदेश लोगों को ज्ञान के मार्ग की ओर ले गया, जिससे उन्हें सही और गलत के बीच अंतर करने में मदद मिली. पैगंबर मुहम्मद पूर्णता के प्रतीक हैं. वह अल्लाह द्वारा हमारे लिए चुने गए आदर्श हैं इस मौके पर जदयू अति पिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश महासचिव सह समाज सेवी डॉ ज्योति प्रसाद उर्फ शत्रुघ्न पंडित ने कहा कि अल्लाह ने सबसे पहले पैगंबर हजरत मोहम्मद को ही पवित्र कुरान अता की थी. इसके बाद पैगंबर साहब ने पवित्र कुरान का संदेश दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाया. यह पर्व आपसी भाईचारे का संदेश देकर मिसाल कायम करती है.मौके पर नसरुद्दीन अंसारी, डॉक्टर अफरोज अंसारी, आजाद अंसारी, शाहबाज अंसारी, नियाज अंसारी, तुफैल अहमद, इश्तियाक अंसारी, आमिर अंसारी, मुसाफिर अंसारी समेत दर्जनों मुस्लिम धर्मावलंबियों उपस्थित थे.

