भाजपा कभी भी अल्पसंख्यक हितैषी नहीं हो सकती है एडवोकेट निसार अख़्तर
अरवल से मुजाहिद हुसैन की रिपोर्ट
अरवल,संविधान की धारा 341(iii). के तहत मिलने वाली अनुसुचित जाति आरक्षण में पसमांदा मुसलमानों को शामिल नहीं करने के समर्थन में भाजपाई केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि पसमांदा मुसलमानों में किसी तरह की छुआछूत नहीं है इसलिए इस समाज को एस सी का दर्जा नहीं दिया जा सकता है. माईनोरिटीज वेल्फेयर सोसाइटी अरवल के अध्यक्ष एडवोकेट निसार अख्तर अंसारी ने कहा कि सच्चाई है कि मुसलमानों में भी छुआछूत और उच्च - नीच का भेदभाव बरकरार है, अपने आप को उच्ची जाति के मानने वाले लोग आज भी पिछड़ी मुस्लिम जातियों को हेय दृष्टि से देखते हैं, मस्जिदों तक तो कुछ हद तक भेदभाव कम दिखती है, हालांकि मस्जिद में भी कहीं कहीं भेदभाव होती है. स्वर्ण मानसिकता वाले अंदरूनी तौर पर उन्हें मस्जिदों में भी अपने साथ नहीं देखना चाहते हैं, समाजिक और सियासी तौर पर तो पिछड़े मुसलमानों को आगे बढ़ते देखना बिल्कुल ही नहीं चाहतें हैं, पिछड़े मुस्लिम अगर कहीं किसी पद का चुनाव लड़े तो तथाकथित स्वर्ण मुस्लिम उन्हें कभी भी वोट नहीं करते हैं, इस तरह मुसलमानों में भी छुआछूत अभी भी है.
इ डब्लू एस के रिजर्वेशन में स्वर्ण हिंदूओं के साथ ही स्वर्ण मुसलमानों को तो आरक्षण सरकार दे रही है मगर दलित हिंदुओं के साथ दलित मुस्लिमों को आरक्षण सरकार नहीं देना चाहती है, दलित मुसलमानों के साथ सौतेला ब्यवहार कर रही है सरकार.
माईनोरिटीज वेल्फेयर सोसाइटी अरवल के अध्यक्ष एडवोकेट निसार अख्तर अंसारी ने मुसलमानों में पिछड़ेपन की बात करते हुए कहा कि अन्य धर्मों की तरह मुसलमानों में भी वे जातियां मौजूद है जो दुसरे धर्म के उसी जाति वाली कार्य और रहन सहन, गरीबी में दिन गुजार रहे हैं. मुसलमानों में भी धोबी, पासी के साथ ही नट, गुलगुलिया, मीरशिकार, इटाफरोश, बक्खो, मीरयासीन, सांई, फकीर, जुलाहा, दर्जी, धुनिया, रंगरेज, कुंजडा, पमरिया, डफाली, चुडीहारा, जैसी जातीयां जो अन्य धर्मों के दलितों जैसे क्रिया कलाप करते ही हैं उनका रहन सहन भी हिंदू धर्म के दलित जातियों से भी भिन्न नहीं है. जिसका जिक्र जस्टिस रंगनाथ मिश्रा और जस्टिस राजेंद्र सच्चर ने अपनी जांच रिपोर्ट में किया है. तथा इन दोनों न्यायमूर्ति ने भी संबधित लोगों को 341(iii). में संशोधन कर के दलित मुस्लिम को अनुसूचित जाति का लाभ देने की वकालत अपने अपने जांच रिपोर्ट में किया है. एक तरफ केंद्र की भाजपाई सरकार पुनः एक आयोग बना कर रिपोर्ट की मांग करने का ढकोसला कर रही है तो वहीं दुसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में शपथ-पत्र देकर यह कह रही है कि दलित /पिछड़े मुसलमानों में छुआछूत नहीं है इसलिए एस सी की दर्जा देने की जरूरत इन्हें नहीं है. मोदी सरकार की पोल खुल गई क्योंकि मोदी जी ने कुछ दिनों पहले ही एक सार्वजनिक मंच से पसमांदा मुसलमानों के प्रति नकली हमदर्दी दिखा कर कहा था कि अब तक सबने पसमांदा मुसलमानों को ठगा है मैं इस समाज का कल्याण करूंगा. जो कि मोदी जी का पुराना आदत है मगरमच्छी आंसू बहाना.मोदी सरकार की इस घोषणा का कुछ तथाकथित पसमांदा मुस्लिम नेताओं ने सर आंखो पर उठाया था और मोदीजी की जय जयकार करने लगे थे.. उन्हें सटीक जबाव मिल गया है. भाजपा कभी भी अल्पसंख्यक हितैषी नहीं हो सकती है.. हितैषी होने का ढोंग कर सकती है. इसलिए भाजपा से सतर्क रहने की जरूरत है.
