रामभद्राचार्य का नाम हिंदू संत समाज में काफी आदर के साथ लिया जाता है:पूर्व विधायक चितरंजन कुमार
अरवल तेलपा में स्वामी रामभद्र चार्य जी महाराज के तत्वाधान में आयोजित विशाल यज्ञ में बह रही भक्ती और ज्ञान की बयार में डूबे हुए हैं श्रोता ।
अरवल पूर्व विधायक चितरंजन कुमार ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि रामभद्राचार्य का नाम हिंदू संत समाज में काफी आदर के साथ लिया जाता है। यह सम्मान उन्होंने अपनी विशेष काबिलियत से हासिल किया है। सुप्रीम कोर्ट में राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद में उनकी गवाही सुर्खियां बनी थीं। वेद-पुराणों के उद्धहरणों के साथ उनकी गवाही का कोर्ट भी कायल हो गया था। श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में वे वादी के तौर पर उपस्थित हुए थेद्ध ऋग्वेद की जैमिनीय संहिता से उन्होंने उद्धहरण दिया था। इसमें सरयू नदी के स्थान विशेष से दिशा और दूरी का बिल्कुल सटीक ब्योरा देते हुए रामभद्राचार्य ने श्रीराम जन्मभूमि की स्थिति बताई थी। कार्ट में इसके बाद जैमिनीय संहिता मंगाई गई। उसमें जगद्गुरु ने जिन उद्धहरणों का जिक्र किया था, उसे खोलकर देखा गया। सभी विवरण सही पाए गए। पाया गया कि जिस स्थान पर श्रीराम जन्मभूमि की स्थिति बताई गई, विवादित स्थल ठीक उसी स्थान पर पाया गया। जगद्गुरु के बयान ने फैसले का रुख मोड़ दिया। सुनवाई करने वाले जस्टिस ने भी इसे भारतीय प्रज्ञा का चमत्कार माना। एक व्यक्ति जो देख नहीं सकते, कैसे वेदों और शास्त्रों के विशाल संसार से उद्धहरण दे सकते हैं, इसे ईश्वरीय शक्ति ही मानी जाती है।
अरवल में कुछ चंद लोग इसपर राजनीति कर रहे हैं जो कि सरासर गलती है, हिंदू धर्म में भगवान और आस्था के प्रति लोगों का विचार एक होनी चाहिए । इस ज्ञान यज्ञ में कोई भी प्रकार की व्यवधान नहीं होनी चाहिए लोग एकदूसरे की भावना को कद्र करते हुए यज्ञ को सफल बनाएं ।
